कुमार गौरव की रिपोर्ट

मंझौल का ए ग्रेड पशु अस्पताल अब पूर्णरूपेण मृतप्राय होने के कगार पर पहुंच गया है जिसके कारण क्षेत्र के पशुपालक किसानों को ग्रामीण चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है और वे उनके आर्थिक दोहन का शिकार हो रहे हैं ।अस्पताल परिसर में फैले जंगल दिन के उजाले में भी डरावने लगते हैं ।ग्रामीणों के अनुसार घने जंगल एवं गंदगी के कारण परिसर में पशुओं को ले जाने में डर लगता है ।

एक समय था जब मंझौल का यह पशु अस्पताल बेगूसराय जिले का शान कहलाता था । 28 जनवरी 1955 को तत्कालीन राज्यपाल जाकिर हुसैन ने इस अस्पताल का उद्घाटन किया था । तब इस समय यहाँ दर्जन भर पशु चिकित्सक एवं कंपाउंडर नियुक्त किए गए थे ।यहां कृत्रिम गर्भधान के लिए सीमेन भी तैयार होता था । विगत 30 अगस्त को तत्कालीन पशुपालन मंत्री मुकेश सहनी को स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में अस्पताल के पुराने दिन वापस लौटाने के लिए माँग पत्र सौंपा था तब उन्होंने अस्पताल के जीर्णोद्धार का आश्वासन दिया था लेकिन उनका आश्वासन हवा हवाई निकला ।

उक्त बाबत अस्पताल के पशु चिकित्सक डॉ अवधेश कुमार बताते हैं कि अस्पताल के साफ सफाई एवं रंग रोगन के लिए कोई फंड नही आता है ।

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