बोखड़ा:- लोक आस्था का चार दिवसीय महान पर्व चैती छठ के तीसरे दिन गुरुवार को व्रतियों ने प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में चैती छठ पूजा का डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया।चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की छठी तिथि को चैती छठ के नाम से जाना जाता है।यह चार दिवसीय पर्व का आज तीसरा दिन है।पर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है और दूसरे दिन होता है खरना|

पंचाग के अनुसार, साल में दो बार छठ पर्व मनाया जाता है। पहला चैत्र माह में और दूसरा कार्तिक माह में पड़ने वाली छठ. कार्तिक माह में आने वाली छठ पर्व का महत्व अधिक होता है।इस पर्व में सूर्य देव और छठी मैया की अराधना की जाती है। ये व्रत संतान की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है। मुख्य रूप से ये पर्व बिहार और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। कहते हैं जो व्यक्ति सच्चे मन से छठ व्रत करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। खरना के दिन व्रती रात को पूजा के बाद गुड़ की खीर खाते हैं और 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं। इसका समापन चौथे दिन सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *