आशीष कुमार की रिपोर्ट

मगध विश्वविद्यालय अभाविप के संयोजक सूरज सिंह ने कहा कि बिहार के इतिहास में पहली पर किसी विश्वविद्यालय कि अपनी सिनेट कि बैठक दूसरे विश्वविद्यालय के काॅलेज में आयोजित कराया गया, यहां बिहार कि वर्तमान शैक्षणिक व्यवस्था पर मंडरा रहे संकट को दर्शाता है, आज काफी दुर्भाग्य कि बात है कि मगध विश्वविद्यालय कि गौरवान्वित इतिहास को प्रभारी कुलपति, कुलसचिव एवं मगध विश्वविद्यालय के कुछ चाटुकार पदाधिकारी धूमिल कर रहें पर उन्हे रोकने वाले अब विश्वविद्यालय में ना कोई शिक्षक बचे और ना ही कोई कर्मचारी।

छात्रों और विश्वविद्यालय का हाल दिन प्रतिदिन अन्धकार में जा रहा है पर उसकी चिन्ता ना सरकार को है – ना ही कुम्भकर्ण कि निन्द में सो रही राज्यभवन को है. छात्र परेशान है पीजी कोर्स कि पढ़ाई जो दो वर्षो में पूरी होनी चाहिए वो 4 वर्षो में भी पूरी नही हो रही, ग्रेजुएट कोर्स कि पढ़ाई जो 3 सालों में पूरा होना चाहिए वो 5 वर्षो में भी पूरा नही हो रहा, वोकेशनल कोर्स एवं प्रोफेशनल कोर्स के बैचलर एवं मास्टर डिग्री के सत्र तीन वर्ष लेट है, सही समय पर छात्रो को ना परीक्षाफल मिलता – ना ही डिग्री. मगध विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने वाले छात्रो का सत्र विलम्ब होने के कारण बेरोजगार होते जा रहे है। काॅलेजों के प्राचार्य को जो मर्जी आता वो कर रहे है कई जेनरल, वोकेशनल एवं प्रोफेशनल कोर्स के नामांकन शुल्क मनमानी रूप से बढ़ा दिया गया है पर उसकी चिन्ता किन्ही मगध विश्वविद्यालय के पदाधिकारीयो को नही है – ना ही सरकार को – ना ही राज्यभवन को।

आज अगर प्रभारी कुलपति, कुलसचिव एवं मगध विश्वविद्यालय के पदाधिकारी बिहारशरीफ में बैठक करा कर बहुत खुश है तो वो भ्रम में है छात्र हित कि मांग को लेकर उन्हे छात्रो का विरोध का सामना करने पड़ेगा, ऐसे तमाम पदाधिकारि को छात्र उनके कुर्सी सहित बाहर फेकने का काम करेगी जो छात्र के भविष्य के साथ खेलने का काम कर रहें है, अब मगध विश्वविद्यालय में छात्र आर-पार कि लडाई लडने को तैयार है। अब मगध विश्वविद्यालय में लुट का काम बंद होगा और छात्र हित कि काम होगी। अभाविप छात्र हित के मांग को लेकर आन्दोलन करेगी। यह सिनेट कि बैठक मगध विश्वविद्यालय के इतिहास में काला दिन के नाम से जाना जायेगा।

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