आशीष कुमार की रिपोर्ट

-‘शब्दाक्षर’ महिला साहित्यकारों को मंचीय स्थान, विशिष्ट पहचान एवं गौरवपूर्ण सम्मान दिये जाने हेतु प्रयत्नशील !—-रवि प्रताप सिंह

राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था “शब्दाक्षर” द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह के संरक्षण में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के सुअवसर पर अॉनलाइन राष्ट्रीय काव्यात्मक अनुष्ठान आयोजित किया गया, जिसका सीधा प्रसारण फेसबुक के केन्द्रीय पेज से किया गया। यह राष्ट्रीय काव्य सम्मेलन “सर्वविदित यह सत्य जगत में, नारी गुण की खान। शब्दाक्षर के नर करते हैं नारी का सम्मान।।” मंत्र को मूलबिन्दु में रखकर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शब्दाक्षर की राष्ट्रीय साहित्य मंत्री नीता अनामिका ने तथा संयोजन व संचालन तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष ज्योति नारायण ने किया। बतौर प्रधान अतिथि कवयित्री संतोष संप्रीति ने शिरकत की। शब्दाक्षर की केरल प्रदेश अध्यक्ष डॉ पी लता को मुख्य अतिथि तथा हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष प्रो डॉ वनीता चोपड़ा को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। काव्य पाठ का शुभारंभ ज्योति नारायण द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना “शारदे विराजिये, नेहाशीष वारिये, भावसुमन अर्पित माँ, नमन स्वीकारिये” से हुआ। स्वागत वक्तव्य तेलंगाना प्रदेश संगठन मंत्री शिल्पी भटनागर ने प्रस्तुत किया। कवयित्री सुशीला चनानी, कात्यायनी कदम, स्नेह लता, शीला संचेती, सावित्री सुमन, डॉ एस कुलश्रेष्ठ, सीमा त्रिवेदी, शिप्रा सैनी, सविता बैनगॉर्ड, सीमा सिंह स्वस्तिका, लीला कुमारी, सुधा मिश्रा, सरिता वैद्य, ज्योत्स्ना डुगर, डॉ अंबिका मोदी, धैर्य जैन, सुनीता लुल्ला ने नारी शक्ति के सम्मान में विचारपूर्ण भावभरी रचनाएँ पढ़ीं। कार्यक्रम अध्यक्ष नीता अनामिका ने सभी प्रतिभागी कवयित्रियों की प्रस्तुतियों की विश्लेषणात्मक प्रशंसा करते हुए सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन शब्दाक्षर की राष्ट्रीय प्रवक्ता-सह-प्रसारण प्रभारी प्रो डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने किया। उन्होंने नारी शक्ति के सम्मान में “नारी तू ही दुर्गा, लक्ष्मी, तू ही जग कल्याणी है, तू ही पार्वती, तू सीता, काली है, ब्रह्माणी है। जब करती है पालन-पोषण, सीता का धर लेती स्वरूप। लड़ती जब बाधा-विघ्नों से दिखती दुर्गा-सम तू अनूप। संगीत, कला, साहित्य सभी विद्याओं को धारण करती। तू शिशु की प्रथम पाठशाला, नारी तू ही है सरस्वती…” पंक्तियाँ प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस कथन का पूर्ण समर्थन किया कि, “‘शब्दाक्षर’ महिला साहित्यकारों को मंचीय स्थान, विशिष्ट पहचान एवं गौरवपूर्ण सम्मान दिये जाने हेतु अनवरत रूप से प्रयत्नशील है”। डॉ.रश्मि ने अपना मंतव्य रखते हुए कहा कि काव्य विविधा जैसे साहित्यिक कार्यक्रम इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने ‘शब्दाक्षर’ को हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में चलाया जा रहा देशव्यापी अभियान बताया। शब्दाक्षर के उज्ज्वल अंतरराष्ट्रीय भविष्य की कामना करते हुए डॉ रश्मि ने राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह सहित समस्त शब्दाक्षर परिवार की ओर से कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह सत्य, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दया शंकर मिश्र, राष्ट्रीय सचिव सुबोध कुमार मिश्र, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी निशांत सिंह गुलशन, राष्ट्रीय उपसचिव सागर शर्मा आजाद, उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिंह वीर, मध्य प्रदेश अध्यक्ष राजीव खरे, गोवा प्रदेश अध्यक्ष वंदना चौधरी, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष श्यामल मजूमदार, तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष ज्योति नारायण व सभी कर्मशील अधिकारियों तथा मीडिया परिवार के प्रति हार्दिक कृतज्ञता जताई।

ज्ञात हो कि “अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस” को मद्देनज़र रखते हुए ‘शब्दाक्षर’ के जमीनी कार्यक्रम के अंतर्गत नवलगढ़, झुंझुनूं, राजस्थान में अखिल भारतीय मातृशक्ति कवयित्री और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों से आमंत्रित चयनित कवयित्रियों को मीराबाई साहित्य रत्न सम्मान प्रदान किया गया। महिला सशक्तीकरण को केन्द्र बिंदु बनाकर देश भर की जानी मानी ‘शब्दाक्षर’ से संलग्न कवयित्रियों ने हृदयस्पर्शी काव्य पाठ किया। इस कार्यक्रम के आयोजक मंडल में बतौर संरक्षक शब्दाक्षर के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह जी के साथ आयोजक रमाकांत सोनी, राष्ट्रीय उप मीडिया प्रभारी सुश्री अनुश्री दूबे, संयोजक मुकेश मारवाड़ी, समन्वयक कासिम बीकानेरी शामिल थे। यह एक अत्यंत भव्य आयोजन था, जिसमें शब्दाक्षर की विभिन्न प्रादेशिक इकाइयों के कवि- कवयित्रियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ पढ़ीं। रात में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। संचालन हरीश हिन्दुस्तानी ने किया। इसी श्रृंखला में माह में दो बार होने वाले ‘शब्दाक्षर’ के साहित्यिक साक्षात्कार के अंतर्गत वार्ताकार नीता अनामिका ने आस्ट्रेलिया से जुड़े प्रख्यात कवि स्वर्गीय डॉ कुँअर बेचैन के साहित्यकार पुत्र प्रगीत कुँअर तथा कवयित्री पुत्रवधु डॉ भावना कुँअर से बातचीत की।

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